Tuesday, December 4, 2012

कविता - उम्मीदें


1.आशाओं के आँचल जो थामें
   अन्धेरी राहोँ को रोशन जो करें,
   ये वो किरण हैं जो कहीं भी जल उठें !

2. 
राह रोशन है कही, है कही सन्सार सजा,
    नजरे मिली है कही, है कही दिल का बाग हरा !

3. बिन जुबान किये वादे हैं ये,
    झुकती नजरों के अरमान हैं ये,
    कहीं रिश्तों की भाषा हैं ये,
    कहीं प्यार की परिभाषा हैं ये !

4. कल की उम्मीद में हैंहम आज जिन्दा,
    मंजिल की उम्मीद में है काफीला बना,
    राह भी थमी है, एक राही की उम्मीद में
    इसी के दम पर है दिल की धड्कन जवां !


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