Thursday, July 14, 2011

Poem - पलकें - 2

नाम तो याद नहीं, लेकिन याद आती है पलकें,
बचपन की यादो से, कही चमक जाती है पलकें,
वो फाग में, किसी के रंग में, सराबोर होने की चाह में,
किसी और ही के रंग में, रंग जाती है ये पलकें !!

हर उजाले में भी, दिवाली तलाशती रहती है पलकें,
जब दिल खो जाये तो, चेहरा तलाशती है पलकें,
मजबूरीयाँ कर देती है जब दूर दो चाहतों को,
हर आने वाली राह पे, हमसफ़र तलाशती है पलकें !!

चाह तो बहुत थी हमें भी, की सहारा दे किसी की पलकें,
कभी अपनों ने, कभी परायो ने भिगोई हमारी पलकें, 
जाने क्यूँ कुछ ऐसा हो गया है हमें भी ज़माने में,
अनजाने में हम भी, भिगो जातें है किसी की पलकें !!

Friday, July 8, 2011

Poem - पलकें

अपनी ही एक भाषा को कहती है पलकें, 
प्यार और नाराजगी दोनों को समझती है पलकें,
दूरीयाँ हो दिल की या जुबान की बने न हिम्मत,
सन्देश तब भी दूसरे तक पहुंचाती है पलकें,

जाने कितने समझे और कितने न समझ पाए,
कुछ ने कदम बढ़ाये और कुछ बढने से डर गए
कुछ ने लिखी कहानियां और कुछ आश करते पाए
लेकिन कदम कदम पे साथ रहा, और याद आई पलकें, 

प्रेम की शुरुआत, पलक झुकने से कही जाती है,
और जब बंद हो पलकें तो वीरानी छा जाती है,
हर आश के दीप यहाँ जलाये जातें है,
और कुछ पलको के झोंके से बुझ जातें है,

आखों में डूबने को हर दिल की तमन्ना होती  है,
हर वो गहरायी तलाशने की जिद सी होती है,
पर जब डूबने लगता है दिल गहरायी में,
तो इन्ही पलकों का साहिल, और किस्तिया होती है,

हर मुस्किल में, जब एक हाँ की जरुरत होती है,
हर मोड़ में, जब एक नयी डगर चुननी होती है,
जब हर आश में जब किसी की आश तलाशी जाती है,
तब राही, हमसफ़र की पलकें ही याद आती है !!