Thursday, July 14, 2011

Poem - पलकें - 2

नाम तो याद नहीं, लेकिन याद आती है पलकें,
बचपन की यादो से, कही चमक जाती है पलकें,
वो फाग में, किसी के रंग में, सराबोर होने की चाह में,
किसी और ही के रंग में, रंग जाती है ये पलकें !!

हर उजाले में भी, दिवाली तलाशती रहती है पलकें,
जब दिल खो जाये तो, चेहरा तलाशती है पलकें,
मजबूरीयाँ कर देती है जब दूर दो चाहतों को,
हर आने वाली राह पे, हमसफ़र तलाशती है पलकें !!

चाह तो बहुत थी हमें भी, की सहारा दे किसी की पलकें,
कभी अपनों ने, कभी परायो ने भिगोई हमारी पलकें, 
जाने क्यूँ कुछ ऐसा हो गया है हमें भी ज़माने में,
अनजाने में हम भी, भिगो जातें है किसी की पलकें !!

2 comments:

ritesh katta said...

nice poem
teri khud ki hai ya kabadi hai

Gaurav Kr Gupta said...

Very good dear...nice poem....